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पà¥à¤²à¥‚रिसी (Pleurisy) फेफड़ों से संबंधित बीमारी है जिसमें सीने में तेज दरà¥à¤¦ होता है और सांल लेने व छोड़ने पर यह दरà¥à¤¦ और अधिक बढ़ जाता है। यह फेफड़ों को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने वाली ऊतकों की परत को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है जिससे परेशानी बढ़ जाती है।
आपके फेफड़ों के ऊपर ऊतकों की पतल लेयर होती है जिसे पà¥à¤²à¥‚रा कहते हैं। यह फेफड़ों को चेसà¥à¤Ÿ वॉल (सीने की दीवार) से अलग करती है, लेकिन किसी कारणवश जब पà¥à¤²à¥‚रा में सूजन आ जाठतो उस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को पà¥à¤²à¥‚रिसी (Pleurisy) कहा जाता है। इसमें सीने में तेज दरà¥à¤¦ होता है और सांस लेते समय दरà¥à¤¦ और अधिक बढ़ जाता है और सांस लेते समय परेशानी होती है। ऊतकों की à¤à¤• लेय फेफड़े को बाहर से कवर करती है और दूसरी लियर आंतरिक चेसà¥à¤Ÿ वॉल से उसे अलग करती है। इन दोनों पलती लेयर के बीच जो थोड़ी जगह होती है इसमें तरल पदारà¥à¤¥ à¤à¤°à¤¾ होता है। सामानà¥à¤¯ रूप से ऊतकों की दोनों परतें सà¥à¤®à¥‚दली काम करती हैं और सांस लेते और छोड़ते समय फेफड़े को फैलने और संकà¥à¤šà¤¿à¤¤ होने में किसी तरह की बाधा नहीं पहà¥à¤‚चाती। लेकिन पà¥à¤¸à¥‚रिसी होने पर ये ऊतक सूज जाते हैं जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प दोनों लेयर आपसे में रगड़ती है जिससे सांस लेते और छोड़ते समय दरà¥à¤¦ होता है, लेकिन जब आप सांस रोकते हैं तो दरà¥à¤¦ नहीं होता है। तो कà¤à¥€ आपको सीने में तेज दरà¥à¤¦ हो तो उसे सिरà¥à¤« हारà¥à¤Ÿ अटैक न समà¤à¥‡à¤‚, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤²à¥‚रिसी का à¤à¥€ यही मà¥à¤–à¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ है।
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